
📰 सहारनपुर के बेरी बाग बिजलीघर के 66 केवीए लाइन क्षेत्र में ‘यमराज’ बने बिजली के खंभे: ओवरलोड ट्रॉलियां दे रहीं बड़े हादसे को न्योता, दो दिन पहले हुआ हादसा, फिर भी नहीं जागे उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के जिम्मेदार अधिकारी
सहारनपुर के बेरी बाग बिजलीघर से संचालित 66 केवीए विद्युत लाइन क्षेत्र से जुड़े जनक नगर इलाके में बिजली विभाग की लापरवाही अब आम जनता की जान पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। क्षेत्र में लगे बिजली के खंभे ऐसे प्रतीत होते हैं मानो ‘यमराज’ बनकर किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हों। कई स्थानों पर बिजली के खंभे सड़क के बिल्कुल पास या बीचों-बीच खड़े हैं, जिससे आने-जाने वाले वाहन चालकों और राहगीरों के लिए हर समय हादसे का खतरा बना हुआ है। यह पूरा क्षेत्र उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) के अधीन आता है, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी लगातार देखने को मिल रही है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जनक नगर क्षेत्र में दो दिन पहले ही एक बड़ा हादसा हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की आंखें अब तक नहीं खुली हैं। क्षेत्र से गुजरने वाली ओवरलोड ट्रॉलियां और भारी वाहन इन खंभों के कारण लगातार जोखिम में रहते हैं। कई बार ऊंचा सामान लादकर चलने वाली ट्रॉलियां बिजली की लाइनों और खंभों के बेहद करीब से गुजरती हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह लापरवाही जारी रही तो भविष्य में बड़ा हादसा होना तय माना जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बिजली लाइन बिछाने और खंभे लगाने के दौरान ठेकेदारों द्वारा सुरक्षा मानकों की खुलकर अनदेखी की गई है। पैसे बचाने के चक्कर में खंभों को सुरक्षित दूरी पर लगाने के बजाय सड़क के बिल्कुल पास खड़ा कर दिया गया, जिससे आम जनता की जान जोखिम में डाल दी गई है। लोगों का कहना है कि यदि इन खंभों को समय रहते सही स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया गया तो यह किसी भी दिन बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
सबसे हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले में न तो यातायात व्यवस्था को लेकर कोई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं और न ही उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधिकारी इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान दे रहे हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
अब सवाल यह उठता है कि अगर इन खतरनाक बिजली के खंभों और अव्यवस्थित यातायात के कारण कोई बड़ी जनहानि होती है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी—उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, ठेकेदार या स्थानीय प्रशासन? स्थानीय नागरिकों ने पुलिस अधीक्षक ट्रैफिक सहारनपुर से मांग की है कि वे इस गंभीर मामले का तुरंत संज्ञान लें और मौके का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से पहले ही इस खतरे को टाला जा सके।
✍ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – हलचल इंडिया न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – दैनिक आशंका बुलेटिन
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